कांशीराम परिनिर्वाण दिवस पर हमलावर हुईं बसपा प्रमुख: सपा-कांग्रेस घोर जातिवादी व कांशीराम विरोधी

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कहा, सपा प्रमुख की घोषणा मुंह में राम बगल में छुरी जैसी कहावत को कर रही चरितार्थ

लखनऊ। गुरुवार को बसपा के संस्थापक कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस पर शक्ति प्रदर्शन की तैयारी में जुटी मायावती ने सपा द्वारा इसी दिन किए जाने वाले आयोजनों पर हमला बोला है। बसपा सुप्रीमो ने सपा के आयोजनों को छलावा करार दिया है। उन्होंने सपा और कांग्रेस को घोर जातिवादी और कांशीराम का विरोधी करार देते हुए बहुजन समाज से सावधान रहने की अपील की है।

परिनिर्वाण दिवस पर बसपा द्वारा लखनऊ के कांशीराम स्मारक स्थल पर राज्य स्तरीय आयोजन किया जा रहा है। इसमें लाखों की भीड़ जुटाकर बसपा अपनी शक्ति दिखाने के साथ कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने की तैयारी कर रही है। इस बीच सपा ने भी गुरुवार को जिलों में अपने कार्यालयों पर कांशीराम परिनिर्वाण दिवस पर श्रद्धांजलि सभा-संगोष्ठी आदि के आयोजन के निर्देश दिए हैं। इसे लेकर मंगलवार को मायावती ने एक्स पर लिखा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के मूवमेंट को आगे बढ़ाने वाले बसपा के जन्मदाता कांशीराम के प्रति सपा व कांग्रेस आदि पार्टियों का रवैया हमेशा से घोर जातिवादी और द्वेषपूर्ण रहा है।

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नौ अक्टूबर को उनके परिनिर्वाण दिवस पर संगोष्ठी आदि करने की सपा प्रमुख की घोषणा घोर छलावा और मुंह में राम बगल में छुरी, की कहावत को चरितार्थ करने वाला ज्यादा लगता है। सपा ने कांशीराम के जीते-जी दगा करके उनके मूवमेंट को यूपी में कमजोर करने की कोशिशें कीं। बसपा सरकार द्वारा वर्ष 2008 को कासगंज को जिला बनाकर दिए गए कांशीराम नगर के नाम को भी जातिवादी सोच व राजनीतिक द्वेष के कारण बदल दिया ।

कांशीराम के नाम से बने अन्य विश्वविद्यालय, कालेज, अस्पताल, संस्थाओं में से भी ज्यादातर नाम सपा सरकार ने बदले । उनके देहांत पर भी सपा सरकार ने यूपी में एक दिन का भी राजकीय शोक घोषित नहीं किया। वहीं कांग्रेस तब केंद्र सरकार में थी, परंतु उसने भी एक भी दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित नहीं किया था। मायावती ने लिखा कि इसके बाद भी वोटों के स्वार्थ की खातिर सपा व कांग्रेस आदि द्वारा कांशीराम को स्मरण करने का विशुद्ध दिखावा किया जाता रहा है। ऐसी जातिवादी व संकीर्ण सोच वाली सपा, कांग्रेस आदि पार्टियों से लोग जरूर सावधान रहें ।

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